राष्ट्रवाद (Nationalism) क्या हैं?

राष्ट्रवाद Nationalism एक विचारधारा, देश के प्रति अटूट प्यार, राष्ट्रभावना और एक प्रकार की सोच हैं। जिसमें जो व्यक्ति अहम से ज्यादा राष्ट्र प्रेम की भावना में विश्वास रखता हो ऐसे व्यक्तियों की सोच को सामान्यतः राष्ट्रवादी व्यक्ति कहा जाता हैं अर्थात वह स्वहित से पहले राष्ट्रहित के बारे में सोचते हैं। राष्ट्रवादी विचारधारा या सोच राष्ट्र के प्रति अटूट प्रेम व विश्वास को दर्शाता है।

1857 की क्रांति में एकता और राष्ट्रवाद का एक अच्छा उदाहरण देखने को मिलता है। 1857 की क्रांति जिसमे कई भारतीयों ने मिलकर अंग्रेजी शासन की नींव हिला डाली।दोस्तों आज हम विस्तार एवं क्रमबद्ध तरीके से जनिंगे कि राष्ट्रवाद क्या है What is Nationalism या राष्ट्रवादी विचारधारा क्या है और भारत में राष्ट्रवाद की स्तिथि ?

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राष्ट्रवाद क्या हैं What is Nationalism in Hindi

राष्ट्रवाद राष्ट्र के प्रति प्रेम को दर्शाने वाली विचारधारा है जिसमे व्यक्ति अपने राष्ट्र के प्रति अटूट आस्था एवं विश्वास रखता है। राष्ट्रवाद एक ऐसी भावना या विशवास है जिसमें व्यक्ति या समुदाय राष्ट्र के लिए क्रांतिकारी बन जाते है और जरूरत पड़ने पर राष्ट्र के लिए हिंसा में तक उतर जाते हैं। सामान्यतः राष्ट्रवाद का शाब्दिक अर्थ है किसी क्षेत्र विशेष में रहने वाले लोगों या समुदायों का संगठन जिनमें एक विचारधारा या एकता की एक समान भावना होती है इसको ही सामान्य अर्थों में राष्ट्रवाद कहा जाता हैं। 1857 कि क्रांति एवं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को हम मुख्यतः राष्ट्रवाद की भावना के रूप में देख व समझ सकते हैं।

राष्ट्रवाद (Nationalism) क्या हैं?

राष्ट्रवाद nationalism अर्थात राष्ट्र के लिए अपने सभी नैतिक-मूल्यों एवं आदर्शों का समरूप ही राष्ट्रवाद हैं जो देश के प्रति अटूट आस्था को दर्शाता हैं। राष्ट्रवाद वह अटूट बंधन है जो एक जंजीर निर्माण का कार्य करती है जिसमें कही समान विचारधारा वाले व्यक्ति आपस मे जुड़ते रहते है एवं एक विश्व जनमत का निर्माण करते है। राष्ट्रवाद की उचित मात्रा होना राष्ट्र के विकास हेतु अत्यंत उपयोगी है इसका क्षेत्र बहुत व्यापक है इसकी भावना एवं विचार समस्त विश्व मे प्रचलित हैं।

राष्ट्रवाद की उत्पत्ति के आधार

राष्ट्रवाद की उत्त्पत्ति के कई आधार होते है जिनको राष्ट्रवाद के स्रोत Source of Nationalism के रूप में भी जाना जाता है जिनमें यह प्रमुख हैं-

● राजनैतिक आधार – राजनैतिक आधार से आशय उस आधार या स्वरूप का है जिसमें राष्ट्र का राजनीतिकरण हो जाता है अर्थात इसमें विभिन्न दल अपनी-अपनी विचारधारा के साथ-साथ राष्ट्र को विभिन्न भागों में बॉट देते है जिससे विभिन्न राष्ट्रवादी विचारधाराओं का जन्म हो जाता हैं।

● आर्थिक आधार – आर्थिक आधार का राष्टवाद (Nationalism) के अर्थ को हम मार्कसवादी के वर्ग संघर्ष के रूप में देख सकते है जिसमें पूंजीवाद और साम्यवाद की विचारधारा वाले राष्ट्रों का उदय हुआ और आर्थिक रूप से सशक्त और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के गुटों एवं उनकी विचारधाराओं का जन्म हुआ।

● सामाजिक आधार – सामाजिक आधार में हम समस्त कारकों को एकजुट रूप में देख सकते है क्योंकि सभी आधार समाज के अभिन्न अंग है आतंकवाद की अपनी एक अलग विचारधारा होती है वही सुरक्षा कर्मियों की अपनी अलग सोच और विचारधारा होती है दोनों ही समाज का एक हिस्सा है परंतु मानसिक और अपने नैतिक मूल्यों की वजह से भिन्न है जहाँ सैनिक राष्ट्र हेतु अपनी जान दे देते है वही आतंकी राष्ट्र के लिए एवं राष्ट्र की विचारधारा में अटूट और कट्टरपंथी आस्था के कारण जान ले लेते हैं।

● सांस्कृतिक आधार – राष्ट्रवाद का संस्कृतिकरण करना अर्थात संस्कृति की एकता के आधार पर विभिन्न समुदायों में विभक्त होकर अपनी एक सोच एक विचारधारा बना लेना और अपनी सोच एवं अपनी विचारों को ही सर्वोच्च मानकर उसमे पूर्ण आस्था प्रकट करना ही राष्ट्रवाद का संस्कृतिक आधार है। सभी संस्कृति की अपनी एक एकता होती है जिसके आधार पर वह लोगों की अपनी और आकर्षित करने का कार्य करती हैं।

● धार्मिक आधार – धर्म के नाम पर सबसे अधिक लोगों में एकता आती है एक धर्म के लोग प्रायः एक जैसी विचारधारा का पालन करते हैं। प्रायः राष्ट्र के नेता या प्रतिनिधि कर्ता धर्म के आधार वोट बटोरने का प्रयास करते है जिस क्षेत्र में जिस धर्म के लोग रहते है प्रायः उस जगह उसी धर्म के नेता की विजय होती हैं। धर्म के नाम पर लोग जल्दी गुमराह हो जाते है और वह आंख बंद करके अपने धर्म वालो में भरोसा कर लेते है क्योंकि वह धर्म के नाम पर एकता के सूत्र में बंधे हुए होते हैं।

भारत मे राष्ट्रवाद

भारतीय राष्ट्रवाद की शुरुआत प्राचीन काल से ही हो गयी थी। प्रारम्भ में ही भारत को एक राष्ट्रवादी देशों की विचारधारा वाले देशों में गिना जाता था जब भारत मे राजतंत्र था तब भी लोगों में अपने राजा के प्रति गहरी आस्था विद्यमान रहती थी लोग अपने राजा के संबंध में या अपने राजतंत्र के बारे में बुरा-भला सुनना पसंद नही किया करते थे। दिल्ली सल्तनत की बात हो या अंग्रेजी शासन की भारत का राष्ट्रवाद अपनी चरम सीमा में रहा है।

गांधी जी का असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन एवं भारत छोड़ो आंदोलन के संबंध में अध्ययन कर तो पता चलता है कि अंग्रेजी शासन के विरुद्ध समस्त भारतीयों ने एक साथ एकत्रित होकर भारतीय भूमि एवं भारतीय विचारधारा, संस्कृति की रक्षा करने हेतु अपनी आवाज उठाई और राष्ट्रवाद Nationalism को नई दिशा की ओर ले गए। भारत मे वह राष्ट्रवाद का सबसे भयानक रूप था। भारतीय राष्ट्रवाद में कई ऐसे उदाहरण है जो इसकी कहानियां प्रस्तुत करते है। भगत सिंह जैसे युवा जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। भगत सिंह जैसे ही कई युवा जिन्होंने राष्ट्रवाद की भावना के लिए अपने जीवन बलिदान कर दिए।

वर्तमान भारतीय परिप्रेक्ष्य का राष्ट्रवाद

वर्तमान भारतीय परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रवाद का विकसित रूप देखने को मिलता है भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी एवं उनकी पार्टी जो पूर्ण रूप से राष्ट्रवादी विचारधारा का पालन करती है और वर्तमान समय मे हम देख सकते है कि भारतीय प्रधानमंत्री की इस विचारधारा के कारण वह विश्व के सबसे अधिक लोकप्रिय व्यक्ति बन चुके है। उनका यह राष्ट्रवादी सिद्धांत समस्त भारतीय जनता को बेहद पसंद आता है और राष्ट्रवादी विचारधारा के समस्त समर्थक सदैव उनका अनुकरण एवं अनुसरण करते दिखाई देते हैं।

निष्कर्ष –

राष्ट्रवादी विचारधारा वर्तमान समय की सबसे अधिक लोकप्रिय विचारधारा बन चुकी है प्रत्येक व्यक्ति जो अपने देश से प्रेम करता है एवं अपनी संस्कृति एवं समाज के प्रति पूर्ण आस्था रखता है वह राष्ट्रवाद का प्रेमी होता है और सदैव राष्ट्रवाद की समस्त नैतिक मूल्यों का निर्वहन करता है। प्रत्येक प्रतिनिधि कर्ता को चाहिए कि वह इस विचारधारा का अनुसरण करें और दिखावे की राजनीति को त्यागकर विश्वबंधुत्व की भावना का विकास करें।

उम्मीद करते है कि आपको इस पोस्ट को समझने में कोई समस्या उत्पन्न नही हुई होगी हमेशा हमारा यही प्रयत्न रहता है कि हम सम्पूर्ण जानकारी आप तक आसान शब्दो मे पहुचाए। दोस्तो यह पोस्ट राष्ट्रवाद Nationalism क्या है इसके आधार और भारत मे राष्ट्रवाद की स्थिति क्या हैं? आपके लिए सहायक सिद्ध हुई होगी।

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