विदेश नीति क्या हैं? (What is Foreign Policy in Hindi)

विदेश नीति Foreign policy प्रत्येक देश की वह योजना है जिसके अंतर्गत राष्ट्र अपने हितों एवं अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। किसी राष्ट्र की विदेश नीति यह निर्धारण करने में सक्षम होती है कि उसे किस राष्ट्र से अच्छे संबंध रखने है और किससे नहीं। प्रत्येक राष्ट्र अपनी विदेश नीति के आधार पर ही अंतरराष्ट्रीय संबंधों की स्थापना करता है और इन नीतियों का पालन वह हरहाल में करता है चाहे उस राष्ट्र को कूटनीति का सहारा क्यों न लेना पड़े।

प्रत्येक राष्ट्र कूटनीति का प्रयोग अपनी विदेश नीति के क्रियान्वयन हेतु ही करते है। चाणक्य (कौटिल्य) ने विदेश नीति के 6 सूत्रीय सिद्धांतो का प्रतिपादन किया था। आज हम इसी संबंध में जनिंगे कि विदेश नीति What is Foreign policy क्या हैं? इसके तत्व और इसका लक्ष्य या उद्देश्य।

विदेश नीति क्या हैं? (What is Foreign Policy in Hindi)

विदेश नीति (Foreign policy) क्या हैं?

यह सभी राष्ट्रों के उसके विकास का एक जरिया है एक साधन है जिसके द्वारा वह अपने हितों की पूर्ति करते है विदेश नीति राष्ट्रों द्वारा निर्धारित की गयी एक रूपरेखा है जिसके आधार पर वह अन्य राष्ट्रों से विदेश नीति के अनुरूप समस्त गतिविधियों का निर्धारण कर क्रियान्वयन करते हैं। यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति International politics का भी निर्धारण करती है एवं इसके क्रियान्वयन की योजना का निर्माण करने में भी अपनी अहम भूमिका निभाती है। इसमें राज्य अन्य राज्यो की नीतियों एवं विचारधाराओं के अनुरूप अपनी-अपनी विदेश नीति का निर्माण करते है जिससे उनके हितों और अन्य राष्ट्रों की नीतियों में समायोजन स्थापित किया जा सकें।

विदेश नीति अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं अंतरराष्ट्रीय भावनाओं का सम्मिलित रूप है यह राष्ट्रों के लिए मार्ग प्रशस्त करने का कार्य करती है।

जिससे वह सरलता से अन्य देशों की नीतियों एवं उनकी विचारधाराओं के साथ सामंजस्य स्थापित कर अपने हितों की पूर्ति कर सकें। वर्तमान में राष्ट्रों के मध्य की जटिलता को देखते हुए यह आवश्यक है कि विदेश नीति की रणनीतियों में मधुरता एवं मित्रता का भाव प्रकट किया जाए। किसी देश का विकास उसी स्तर या गति से होता है जितनी उनकी विदेश नीति में गुणवत्ता व्याप्त होती है विदेश नीति का सामान्य अर्थ हैं- अन्य देश के साथ संबंधों, व्यापार नियमों, राजनीतिक संबंधों, आर्थिक संबंधों एवं सामाजिक संबंधों की योजना की रूपरेखा तैयार कर उसका क्रियान्वयन करना।

विदेश नीति के निर्धारक तत्व (Determinants of foreign policy)

विदेश नीति के निर्धारक तत्वों में उन तत्वों को सम्मिलित किया जाता है जो विदेश नीति की योजना बनाने में सहायक सिद्ध होते है जो निम्न प्रकार हैं –

● जनसंख्या – किसी राष्ट्र के लिए उसकी जनसंख्या का कम होना या अधिक होना उसके नीति निर्माण में सहायक सिद्ध भी होता है और बाधक भी। अगर किसी राष्ट्र की जनसंख्या ज्यादा होने के बाद भी उसकी सकल घरेलू उत्पाद या प्रति व्यक्ति आय सामान्य है तो यह उसके लिए लाभकारी सिद्ध होता है जैसे भारत और चीन। यह दोनों देश विश्व के लिए बड़ा बाजार है अन्य राज्य यहां अपनी पूंजी निवेश करते है जो दोनों देशों के लिए लाभकारी सिद्ध होता है। ऐसे में बड़े बाजार वाले देशों की विदेश नीति अत्यधिक सफल होती हैं।

● भूमि का क्षेत्र – किसी देश की भौगोलिक स्थिति उसको मजबूती प्रदान करने का कार्य करता है। उदाहरणतः रूस विश्व का सबसे अधिक भौगोलिक क्षेत्रों वाला देश है। इसके भौगोलिक क्षेत्र का विस्तार 1,80,65,700km2 हैं। हम सभी जानते हैं कि विश्व मे अमेरिका के बाद रूस का नाम सबसे शक्तिशाली देशों में शामिल किया जाता है। भौगोलिक क्षेत्र मजबूत होना उस राष्ट्र की विदेश नीति (Foreign policy) के क्रियान्वयन में उसकी सहायता करता है और उसको भी मजबूती प्रदान करता है।

● नेतृत्व की लोकप्रियता – किसी राष्ट की लोकप्रियता उसके लिए विशाल जनमत का निर्माण करती है ऐसे नेता से सभी राष्ट्र प्रायः अच्छे संबंध रखने का प्रयास करते हैं क्योंकि ऐसे में साथ-साथ उनकी भी लोकप्रियता में विस्तार आता है। जिन राष्ट्रों के नेतृत्वकर्ता काफी लोकप्रिय होते है ऐसे नेताओं का विश्वजनमत बहुत अत्यधिक होता है और ऐसे नेता अपने विचारों एवं अपनी रणनीतियों से विश्व को प्रभावित करते हैं।

● आर्थिक एवं सैन्य शक्ति – किसी देश की विदेश नीति Foreign policy की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसकी आर्थिक और सैन्य शक्ति कितनी है अर्थात जो देश जितना विकसित होता है उसकी नीति या उसके आदेश का पालन सभी भली-भांति तरीके से करते है उदाहरणतः अमेरिका को विश्व का सबसे विकसित देश के रूप में देखा जाता है अर्थात अत्यधिक राष्ट्र उसके निर्णयों का पालन करते है कम ही ऐसे राष्ट्र होते है जो उसका विरोध करने का प्रयास करते हैं।

● औद्योगिक, तकनीकी एवं वैज्ञानिक स्तर – किसी राष्ट्र का आर्थिक विकास तभी होता है जब उस राष्ट्र की औद्योगिक, तकनीकी एवं वैज्ञानिक स्तर उच्च कोटि का होता है। जो देश तीनों रूपों से मजबूत होते है ऐसे देशों से अन्य देशों को प्रायः सहायता मांगने में विवश होना ही पड़ता है जिसके बदले वह अपनी विदेश नीति का क्रियान्वयन भली-भांति कर पाते हैं।

● प्राकृतिक संसाधन – जिन राष्ट्रों के पास प्राकृतिक कृपा जितनी अधिक होती है उन देशों के पास प्राकृतिक संसाधनों (Natural Resources) का भंडार उतना अधिक होता है। प्राकृतिक संसाधनों में कोयला,खनिज,सोने,चांदी,पेट्रोल आदि चीजें सम्मिलित होती हैं। जिन देशों के पास इन सभी चीजों की जितनी अधिक मात्रा होती है वह आर्थिक रूप से काफी मजबूत होता है और ऐसे देशों से सभी देश मित्रता करना चाहते है उदाहरणतः सऊदी अरब U.A.E जिसके पास तेल का भंडार है उसकी आर्थिक स्थिति देख हम उसकी शक्ति का अंदाजा लगा सकते हैं।

● विदेश नीति के निर्माणकर्ता – विदेश नीति की सफलता असफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उस नीति का निर्माण किन व्यक्तियों द्वारा किया गया है अर्थात जितने बुद्धिजीवि व्यक्तियों द्वारा एवं अनुभवी व्यक्तियों द्वारा नीति का निर्माण किया जाएगा। उतना ही उसकी सफलता की मात्रा में वृद्धि का अनुमान बढ़ जाता है और अगर नीति का निर्माण अनुभवहीन एवं बुद्धिहीन व्यक्तियों द्वारा होता है तो उसकी असफलता की आशंका बढ़ जाती है अर्थात विदेश नीति का निर्माण करते समय यह देखना अति आवश्यक हो जाता है कि जो व्यक्ति इसका निर्माण कर रहे है उनकी योग्यता क्या हैं?

विदेश नीति के लक्ष्य एवं उद्देश्य (Aims of foreign policy)

1.राष्ट्र की सुरक्षा – विदेश नीति का प्रमुख लक्ष्य राष्ट्र की सुरक्षा करना होता है अतः विदेश नीति का निर्माण करते समय यह ध्यान में रखा जाता है इसकी संरचना ऐसी बनाई जाए जिससे राष्ट्र को भविष्य में खतरे का सामना न करना पड़े।

2.आर्थिक लाभ – विदेश नीति का निर्माण प्रायः राष्ट्र लाभ अर्जित करने के लिए करते हैं। इसकी निर्माण की रूपरेखा का निर्माण इस तरह किया जाता है जिससे वह सभी अन्य देशों से अपने हितों की पूर्ति कर सके। शीत युद्ध के समय गुटनिरपेक्ष आंदोलन विदेश नीति का एक उदाहरण हैं।

3.राष्ट्रहित – विदेश नीति का प्रमुख लक्ष्य राष्ट्र हित एवं राष्ट्र की आवश्यकताओं की पूर्ति करना होता है। विदेश नीति का निर्माण इस तरह किया जाता है जिससे राष्ट्र हितों की पूर्ति की जा सकें। विदेश नीति प्रत्येक राष्ट्र का वह शस्त्र है जिसके द्वारा देश बिना युद्ध लड़े अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। तो दोस्तों आज आपने जाना कि विदेश नीति क्या है What is Foreign policy in hindi और इसके निर्धारक तत्व। दोस्तों अगर आपको हमारी पोस्ट अच्छी लगी हो और ज्ञानवर्धक लगी हो तो इसे अपने मित्रों के साथ अवश्य शेयर करें जिससे वह भी लाभ अर्जित कर सकें और नवीन प्रकरणों की सूचनाओं हेतु हमसे सोशल मीडिया में जुड़े।

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नमस्कार दोस्तों मेरा नाम पंकज पालीवाल है, और मैं इस ब्लॉग का फाउंडर हूँ. मैंने एम.ए. राजनीति विज्ञान से किया हुआ है, एवं साथ मे बी.एड. भी किया है. अर्थात मुझे S.St. (Social Studies) से जुड़े तथ्यों का काफी ज्ञान है, और इस ज्ञान को पोस्ट के माध्य्म से आप लोगों के साथ साझा करना मुझे बहुत पसंद है. अगर आप S.St. से जुड़े प्रकरणों में रूचि रखते हैं, तो हमसे जुड़ने के लिए आप हमें सोशल मीडिया पर फॉलो कर सकते हैं।

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