पूंजीवाद क्या हैं – What is Capitalism in hindi

पूंजीवाद Capitalism एक प्रकार की विचारधारा का नाम है जो मानवता, सामाजिकता से ज्यादा आर्थिक लाभ की पक्षधर हैं। पूंजीवाद में भावनाओं से ज्यादा धन प्राप्त करने में जोर दिया जाता है। पूंजीवाद औद्योगिकी एवं तकनीकी के विकास से प्रेरित था। पूंजीवाद का जन्म अमेरिका में हुआ था।

अमेरिका एक ऐसा देश था जिसने साम्यवादी विचारधारा के विपरीत पूंजीवादी विचारधारा को अपनाया और इसे इसके अंतिम छोर तक के गया। दोस्तों आज हम इस संबंध में विस्तार से जनिंगे की पूंजीवाद क्या हैं What is Capitalism.

पूंजीवाद Capitalism

पूंजीवाद का जन्म शीत युद्ध के दौर में हुआ। शीत युद्ध को पूंजीवाद और साम्यवाद के मध्य की लड़ाई के रूप में भी देखा व समझा जाता हैं। पूंजीवाद का सम्बंध आर्थिक गतिविधियों से होता हैं। इसमें कोई भी देश जो पूंजीवाद का समर्थक होता है वो प्रायः औद्योगिक एवं तकनीकी विकास को महत्व देता हैं। पूंजी के महत्व को स्वीकार करते हुए पूंजीवादी वर्ग आर्थिक विकास पर ही बल देते हैं। एडम स्मिथ ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक The Wealth of Nations में आर्थिक स्थिति के महत्व को स्वीकार करते हुए इस विषय पर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत की हैं।

पूंजीवाद (Capitalism) क्या हैं?

पूंजीवाद क्या हैं? What is capitalism औद्योगिक क्रांति को बढ़ावा देना और तकनीकी एवं मशीनी विकास पर राष्ट्र धन खर्च करना या व्यय करना पूंजीवाद हैं। इसमें सामाजिक विकास से ज्यादा आर्थिक एवं औद्योगिक विकास पर अत्यधिक बल दिया जाता हैं। पूंजीवाद में एक राष्ट्र आर्थिक विकास हेतु अन्य देशों से आर्थिक संधि करता है जिससे वह आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें। पूंजीवाद (Capitalism) एक ऐसी विचारधारा है जिसे हर देश अपनाना चाहता हैं परंतु यह बहुत मायने रखता हैं कि उस देश की स्थिति क्या पूंजीवादी विचारधारा के अनुरूप है या नहीं? क्योंकि यही सफलता और असफलता का निर्धारण करती हैं।

पूंजीवाद और साम्यवाद (Capitalism and Communism)

पूंजीवाद और साम्यवाद की नीतियों एवं विचार एक दूसरे से एकदम भिन्न है साम्यवाद पूंजीवाद को सदैव शोषण का साधन मानते आ रहा हैं। साम्यवाद के समर्थकों के अनुसार पूंजीवाद द्वारा श्रमिको एवं नागरिकों के अधिकारों का हनन किया जाता हैं एवं उनका शोषण किया जाता हैं। साम्यवादियों के अनुसार पूंजीवाद ने मशीनीकरण को उजागर किया है, जिससे लाखों श्रमिक बेरोजगार हो गए है एवं भुखमरी जैसी महामारी फैल रही हैं। इनके अनुसार पूंजीवाद सामाजिक गतिविधियों की क्रियाओं में बाधा डालने का कार्य करता हैं। जहाँ पूंजीवाद का उद्देश्य आर्थिक लाभ अर्जित करना है वही साम्यवाद आर्थिक लाभ से ज्यादा मानवता, सामाजिकता एवं सांस्कृतिक विकास पर बल देता हैं।

जहाँ साम्यवाद सामाजिक गतिविधियों से संबंध रखता है तो वही पूंजीवाद आर्थिक गतिविधियों की देन हैं। पूंजीवाद और साम्यवाद अपनी-अपनी विचारधाराओं और नीतियों एवं क्रियाओं तीनों आधारों पर एक दूसरे से भिन्न हैं। दोनों की अपनी-अपनी विचारधारा है जो एक दूसरे को एक दूसरे से अलग करती है और दोनों विचारधाराओं के अपने-अपने नैतिक-मूल्य है एवं अपने-अपने उद्देश्य एवं लक्ष्य हैं। साम्यवाद जहाँ सम्पूर्ण विश्व के समस्त पहलुओं पर ध्यान देता है वहीं पूंजीवाद विचारधारा को स्वार्थी माना जाता हैं इनका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ अधिक से अधिक धन अर्जित करना लाभ प्राप्त करना होता हैं।

पूंजीवाद की विशेषता (Characteristic of Capitalism)

● पूंजीवाद का संबंध आर्थिक गतिविधियों (Economic activities) से होता हैं।

● यह औद्योगिकी एवं तकनीकी विकास पर बल देता है और यह मशीनीकरण की उपज मानी जाती हैं।

● पूंजीवाद एक आर्थिक प्रणाली हैं जो धन या मूल्य प्रणाली के नाम से भी जानी जाती हैं।

● श्रम विभाजन एवं श्रमिकों के बदले मशीनों के विकास पर बल दिया जाना पूंजीवादी विचारधारा का ही एक रूप हैं।

● पूंजीवाद वह सोच है जिसमें कोई राष्ट्र समाज के विकास से ज्यादा पूंजी के विकास पर जोर देता हैं।

पूंजीवाद एक अर्थव्यवस्था है जिसमें आर्थिक रूप से समस्त पहलुओं को व्यवस्थित करके रखा जाता हैं और पूंजीवादी वर्ग में प्रायः उन वर्गों को सम्मिलित किया जाता हैं जो अपनी नीतियों का निर्माण पूंजी द्वारा अधिक से अधिक लाभ कमाने की योजना के लिए करते हैं। औद्योगिकरण का पूंजीवाद निर्माण में बहुत अहम योगदान रहा हैं। आधुनिक समय मे औद्योगिकरण के विकास को देखते हुए हम यह कह सकते हैं कि वर्तमान विश्व व्यवस्था पूंजीवाद Capitalism की ओर बढ़ रही हैं। पूंजीवाद एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें प्रत्येक देश की नीति का झुकाव आर्थिक गतिविधियों के मध्य ही होता हैं।

किसी भी राष्ट्र का पूंजीवाद की ओर झुकाव उसके विकास की स्थिति को जरूर दर्शाता है परंतु पूंजीवादी विचारधारा या विचार प्रत्येक समाज की परिस्थितियों के अनुरूप नही होते इसका उदाहरण हम शीत युद्ध के दौर में देख सकते है रूस की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद भी वह अन्य देशों से हथियार एवं अन्य सामग्री खरीदता था। जिससे उसका राजकोष का सारा धन उसमें ही खर्च हो जाता था जिससे उसकी सामाजिक,आर्थिक और शैक्षिक व्यवस्था पूर्ण रूप से बिखर चुकी थी इसी का अनुभव करते हुए मिखाइल गोर्बाचोव ने शीत युद्ध का समापन किया और सोवियत संघ का विघटन हो गया।

निष्कर्ष –

दोस्तों किसी भी राष्ट्र के लिए उसका औद्योगिक एवं तकनीकी विकास अत्यंत मायने रखता हैं परंतु वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह अत्यंत आवश्यक है कि इस नीति का पालन तभी किया जाए जब उस राष्ट्र की आर्थिक स्थिति पहले से काफी मजबूत हो सर्वप्रथम देशों को आंतरिक रूप से विकसित होने की अत्यंत आवश्यकता हैं। दोस्तों आज हमने इस पोस्ट के माध्यम से जाना कि पूंजीवाद क्या हैं What is Capitalism , अगर आपको यह ज्ञान ज्ञानवर्धक लगा हो और आपको सरलता से समझ मे आया हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताए और इसे अपने मित्रों के साथ भी अवश्य शेयर करें ताकि वह भी ज्ञान का अर्जन कर सकें।

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1 COMMENT

  1. अच्छी जानकारी रही आपकी निबंध में ऐसे ही और लिखते रहें
    धन्यवाद

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