दिल्ली सल्तनत के शासक (Rulers of Delhi Sultanate in hindi)

दिल्ली सल्तनत Delhi Sultanate के शासक या शासकों का साम्राज्य 1206-1526 तक माना जाता हैं। आप सभी जानते है, हमारे देश भारत का इतिहास अत्यधिक पुराना हैं। इसके विषय में हम जितना जनिंगे उतना कम हीं होगा। परन्तु आज हम हमारे देश के इतिहास के बारे में जानेंगे। वह भी दिल्ली सल्तनत के विषय में यूँ तो हमारे देश में अनेको सल्तनत काल हुए है पर उन सभी में दिल्ली सल्तनत को अत्यधिक पूछा जाता हैं क्योंकि दिल्ली ही एक मात्र ऐसा स्थान था।

जिस पर प्रत्येक बादशाह या राजा राज्य करना चाहता था। इस पर विजय पाना सभी के बस की बात नहीं थी। तो चलिए आज हम इसके बारे में आपको बताते हैं कि दिल्ली सल्तनत Delhi Sultanate के शासक कौन-कौन थे? परंतु उससे पहले कुछ जानकारी जो हम दिल्ली सल्तनत के विषय में साधारणत: जानते हैं।

दिल्ली सल्तनत के शासक और उनका इतिहास (Rulers of Delhi Sultanate and their History)

दिल्ली सल्तनत (Delhi Sultanate) के शासक कौन-कौन थे?

सन 1192 ई. में मोहम्मद गौरी ने राजा पृथ्वीराज चौहान को तराइन के युद्ध मे हराया था। उस समय पृथ्वीराज चौहान अजमेर और दिल्ली के राजा थे। इस घटना के पशचात ही मोहम्मद गौरी ने सन 1194 ई. में चंदावर के युद्ध में गहड़वाल शासक राजा जयचंद को भी पराजित किया था। सन 1206 ई. में मोहम्मद गौरी की मृत्यु हो गई। मोहम्मद गोरी का कोई पुत्र नहीं था उसने अपने दास कुतुबुद्दीन ऐबक को ही अपना उत्तराधिकारी माना तत्पश्चात कुतुबुद्दीन ऐबक ने ही गुलाम वंश की स्थापना की।

कुतुबुद्दीन ऐबक ने गुलाम वंश की स्थापना की थी एवं गुलाम वंश के साथ ही दिल्ली सल्तनत Delhi sultanate का प्रारंभ हुआ था। इसकी राजधानी लाहौर को बनाया गया व कुतुबुद्दीन ऐबक ने हीं दिल्ली में कुतुब मीनार की नींव रखी थी। कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु चौगान खेलते समय घोड़े से गिरने के कारण हुई थी इस इस काल को इतिहास में तवारीख के नाम से भी जाना जाता है जो तत्कालीन विद्वानों एवं प्रशासकों के द्वारा लिखा गया यह फारसी भाषा में लिखा गया था।

दिल्ली सल्तनत के शासक वंश (The Ruling Dynasty of delhi sultanate)

● गुलाम वंश( 1206- 1290 ई.) हमने बताया दिल्ली सल्तनत की शुरुआत गुलाम वंश की स्थापना से होती है जिसका संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक था।

● खिलजी वंश( 1290- 1320ई. ) यह वंश दिल्ली सल्तनत पर शासन करने वाला द्वितीय वंश था अलाउद्दीन खिलजी इस वंश का महानतम शासक था। उसने भारत पर मंगोल आक्रमण को रोकने का कार्य किया।

● तुगलक वंश( 1320- 1413ई. ) यह दिल्ली सल्तनत पर शासन करने वाला तृतीय वंश था इस वंश का सबसे महानतम शासक मोहम्मद बिन तुगलक था।

● सैयद वंश( 1414- 1451) सन 1398ई. मैं तैमूर लंग ने दिल्ली पर आक्रमण किया। तैमूर लंग के वंशज ने जिस वंश की स्थापना की थी उसे सैयद वंश के नाम से जाना जाता है

● लोदी वंश( 1451- 1526ई. ) इस वंश का अंतिम शासक इब्राहिम लोदी था जिसे बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में पराजित कर दिया एवं मुगल वंश की स्थापना की।

दिल्ली सल्तनत का विस्तार (Extention of delhi sultanate)

13वीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में दिल्ली के सुल्तानों का शासन गैरसिनो अर्थात ( रक्षक सैनिकों की टुकड़ियों) के निवास के लिए बनी मजबूत किलेबंदी शहरों से अलग शायद ही फैला हो। शहरों से मिले हुए लेकिन उनसे दूर भीतरी, प्रदेशों में उनका नियंत्रण ना के बराबर था और इसलिए उन्हें आवश्यक सामग्री, व सामान आदि के लिए व्यापार, कर या लूटमार आदि पर ही निर्भर रहना पड़ता था।

● दूसरा विस्तार सल्तनत की बाहरी सीमा पर हुआ था। अलाउद्दीन खिलजी के शासन काल में दक्षिण भारत का लक्ष्य नाम से सैनिक अभियान शुरू हुए और यह अभियान मोहम्मद तुगलक के समय में अपनी चरम सीमा पर पहुंचे। इन अभियानों में सल्तनत की सीमाओं ने हाथी घोड़े, गुलाम, और मूल्यवान धातुओं अपने कब्जे मैं ले ली।

● दिल्ली सल्तनत delhi sultanateकी जो सेनाओं की शुरुआत हुई थी वह सोच के अनुसार जरा कमजोर थी। परंतु डेढ़ सौ वर्ष बाद, मोहम्मद तुगलक के राज्य काल के अंत के समय इस उपमहाद्वीप का एक विशाल क्षेत्र इसके युद्ध -अभियान के अंतर्गत आ चुका था। जिसके द्वारा शत्रुओं की सेनाओं को परास्त किया गया और शहरों पर कब्जा किया गया। इसके सूबेदार और प्रशासक मुकदमे में फैसला सुनाते थे और साथ ही किसानों से कर वसूला करते थे।

दिल्ली सल्तनत के शासकों की कार्यप्रणाली के महत्वपूर्ण बिंदु (15वीं तथा 16वीं शताब्दी में सल्तनत)

● तुगलक वंश के बाद 1526 ई. तक दिल्ली तथा आगरा पर सैयद तथा लोदी वंश का राज्य रहा। तब तक जौनपुर, बंगाल, मालवा, गुजरात, राजस्थान तथा पूरे दक्षिण भारत में स्वतंत्र शासक उठ खड़े हुए थे। उनकी राजधानियां समृद्धि और राज्य फल फूल रहे थे।

● शेरशाह सूरी (1540-1545 ई.) ने बिहार में अपने चाचा के एक छोटे से इलाके के प्रबंधक के रूप में काम शुरू किया था और आगे चलकर उसने इतनी उन्नति की, की मुगल सम्राट हुमायूं(1530-1540 और 1555-1556ई.) तक को चुनौती दी और परास्त किया। शेरशाह ने दिल्ली पर अधिकार करके स्वयं अपना राजवंश स्थापित किया।

● हालांकि, सूर्यवंश ने केवल 15 वर्ष (1540-1555ई.) शासन किया। लेकिन इसके प्रशासन ने कई तरीकों को अपनाकर इसे चूस्त बना दिया। महान सम्राट अकबर(1556-1605 ई.) ने जब मुगल साम्राज्य को स्थापित किया तो उसने अपने प्रतिमान के रूप में शेरशाह सूरी की प्रशासन व्यवस्था को ही अपनाया था।

दिल्ली सल्तनत के शासक या शासकों की प्रमुख उपलब्धियां-

● तुगलक काल में मौद्रिक अर्थव्यवस्था को लागू करने का प्रयास किया गया। राज्य के राजस्व का प्रमुख स्त्रोत कृषि हुआ करता था।

● मोहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित किया था जो कि बहुत ही अलोकप्रिय एवं कष्टकारी कदम था जिसे बाद मैं मोहम्मद बिन तुगलक ने वापस ले लिया था।

● दिल्ली के सुल्तान कुरान एवं शरीयत के आधार पर अपना शासन चलाते थे।

● यह गैर मुस्लिमों शासकों को अपने धर्म का पालन करने के लिए स्वतंत्र रखते थे, बशर्ते कि वे जजिया कर अदा करें।

● दिल्ली के सुल्तान गयासुद्दीन बलबन के शासन की प्रशंसा में एक संस्कृत प्रशस्ति में उसे एक विशाल साम्राज्य का शासक बताया गया है जो पूर्व में बंगाल से लेकर पश्चिम में अफगानिस्तान के गजनी तक फैला हुआ था।

दोस्तों, आज हमने जाना कि दिल्ली सल्तनत के शासक (Rulers of Delhi Sultanate in hindi) कौन-कौन थे? जिन्होंने दिल्ली पर शासन किया और अपना इतिहास रचा और साथ में इस सल्तनत के मुख्य बिंदुओं पर भी हमने प्रकाश डाला। अंत में अगर आपको दिल्ली शासकों के अलावा दूसरे किसी प्रकरण में जानकारी चाहिए हो तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं और अगर आपको हमारी यह पोस्ट ज्ञानवर्धक लगी हो और आपको इसके माध्यम से कुछ नया जानने को मिला हो तो इसे अपने मित्रों के साथ अवश्य शेयर करें।

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Pankaj Paliwal
नमस्कार दोस्तों मेरा नाम पंकज पालीवाल है, और मैं इस ब्लॉग का फाउंडर हूँ. मैंने एम.ए. राजनीति विज्ञान से किया हुआ है, एवं साथ मे बी.एड. भी किया है. अर्थात मुझे S.St. (Social Studies) से जुड़े तथ्यों का काफी ज्ञान है, और इस ज्ञान को पोस्ट के माध्य्म से आप लोगों के साथ साझा करना मुझे बहुत पसंद है. अगर आप S.St. से जुड़े प्रकरणों में रूचि रखते हैं, तो हमसे जुड़ने के लिए आप हमें सोशल मीडिया पर फॉलो कर सकते हैं।

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