शिक्षण के स्तर (Levels of Teaching in Hindi)

शिक्षण के स्तर (Levels of Teaching) वह आधार है जिसके माध्यम से छात्रों का बौद्धिक विकास किया जाता है। इसमें छात्रों का क्रमबद्ध तरीके से बौद्धिक विकास किया जाता है। शिक्षा अर्थात छात्रों का बौद्धिक, मानसिक एवं शारीरिक तीनों पक्षों के विकास करने हेतु शिक्षण की आवश्यकता पड़ती हैं। इसीलिए यह आवश्यक है कि शिक्षा प्रदान करने के लिए छात्रों को उनके मानसिक एवं बौद्धिक आधार पर शिक्षा प्रदान की जाए।

इन सभी की आवश्यकताओं को स्वीकार करते हुए शिक्षण को 3 स्तरों में विभक्त किया गया हैं-

1. स्मृति स्तर (Memory Level)
2. बोध स्तर (Understanding Level)
3. चिंतन स्तर (Reflective Level)

निम्न शिक्षण के स्तरों (Levels of Teaching) को छात्रों की आयु के आधार पर क्रमबद्ध प्रस्तुत किया गया हैं, इसमें छात्रों के बौद्धिक स्तर एवं उनकी आयु के आधार पर निम्न स्तरों को क्रमबद्ध रूप से अपनाया जाता हैं। अर्थात बाल्यावस्था एवं शिशुअवस्था में स्मृति स्तर (Memory Level) को महत्व स्थान दिया जाता हैं, तत्पश्चात जब बालक की आयु के साथ-साथ बौद्धिक विकास में भी वृद्धि होती है तो ऐसे में उन्हें बोध स्तर की शिक्षा प्रदान की जाती है वही जब उनकी बुद्धि पूर्ण रूप से परिपक्व हो जाती है तो उन्हें चिंतन स्तर (Reflective Level) का शिक्षण करवाया जाता हैं।

शिक्षण के स्तर (Levels of Teaching)

शिक्षण के मुख्यतः तीन स्तर हैं, जिनके आधार पर बालको की शिक्षण प्रक्रिया का क्रियान्वयन किया जाता हैं। जिनके आधार पर छात्रों का बौद्धिक और मानसिक विकास किया जाता हैं।

शिक्षण के स्तर (Levels of Teaching)

1. स्मृति स्तर (Memory Level) – स्मृति स्तर वह आधार है जिसमे छात्रों के मानसिक स्तर के एक स्मृति पक्ष को आधार बनाकर शिक्षा प्रदान की जाती हैं। यह बाल्यावस्था एव शिशुअवस्था में प्रदान करवाई जाती है क्योंकि इसमें बालक का बौद्धिक विकास अपने शुरुआती दौर में होता हैं।

बालक किसी भी चीज को समझने हेतु उसका एक चित्र या चिन्ह के रूप में अपने मस्तिष्क में धारण कर लेते हैं। उदाहरणतः जब उन्हें कोई कहानी सुनाई जाती है तो वह बिना उस कहानी के पात्रों की आकृति अपने मस्तिष्क में धारण कर लेटर है इसे ही सामान्यतः शिक्षण का स्मृति स्तर कहा जाता हैं।

स्मृति स्तर की अवस्थाएं Memory level states

1. अधिगम (Learning) – स्मृति के स्थरीकरण हेतु अधिगम का बेहद अहम योगदान होता है, क्योंकि किसी व्यक्ति की स्मृति को तभी स्थायित्व प्राप्त होता है जब उसे उस प्रकरण से संबंधित याद हो तभी बालक अपनी स्मृति को संचित करके रख सकता हैं।

2. धारण (Retention) – किसी प्रकरण से संबंधित पहलुओं को अपने मस्तिष्क में संजोय रखने को धारण करना कहते हैं, अर्थात बालक जितने अधिक समय तक किसी बात को अपने मस्तिष्क में धारण करके रखता है वह उसकी धारण शक्ति को प्रदर्शित करता हैं।

3. प्रत्यास्मरण (Recall) – धारण की हुई वस्तु को आवश्यकतानुसार पुनः स्मरण करना अर्थात सीखी हुई वस्तु को भविष्य में अपने काम मे लाने की क्षमता को ही प्रत्यास्मरण कहते हैं।

4. पहचान (Recognition) – किसी रास्ते मे पुनः जाने पर यह पहचान लेना कि हम यहाँ पहले भी आए थे। अतः स्मृति का पुनःस्मरण करना ही पहचान हैं।

स्मृति का वर्गीकरण Classification of Memory

1. तत्कालीन स्मृति (Immediate Memory) – तत्कालीन स्मृति स्मृति का वह प्रकार है, जो निश्चित समय तक ही स्थायी रहता है। उदाहरण के लिए जब हम किसी प्रकरण की रटते है तो वह हमारी तत्कालीन स्मृति के अंतर्गत आती हैं।

2. स्थायी स्मृति (Permanent Memory) – स्थायी स्मृति में याद करने की क्षमता अधिक होती है, इसमें व्यक्ति सीखी हुई वस्तु का आसानी से प्रत्यास्मरण कर लेता हैं।

अच्छी स्मृति की विशेषता Characteristics of Good Memory

1. शीघ्र अधिगम – अच्छी स्मृति वह होती है, जिसको सुनते ही हमारे मस्तिष्क में उसकी आकृतियों या चिन्ह स्थापित हो जाते है, ऐसी स्मृति स्थायी होती हैं।

2. स्थायित्व – वह स्मृति सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है, जिनको हम अधिक समय तक धारण कर सकते हैं।

3. पुनः स्मरण – अच्छी स्मृति वह है जिसे आवश्यकता पड़ने पर आसानी से पुनःस्मरण किया जा सकें।

2. बोध स्तर (Understanding Level) – बोध स्तर का शिक्षण शिक्षण के स्तर Levels of Teaching का मध्य स्तर हैं, इसमें उन छात्रों को सम्मिलित किया जाता है। जिनकी बुद्धि विकासशील होती है और जिनका स्मृति स्तर के उद्देश्यों की प्राप्ति हो जाती है, तत्पश्चात शिक्षण को बोध स्तर की ओर ले जाया जाता हैं।

जिसमें छात्रों को रट कर याद करने के बजाय उन्हें प्रकरण के समस्त पहलुओं को बारीकी से समझाया जाता है। जिससे उनका मस्तिष्क उस प्रकरण के पहलुओं को समझ कर उनके मध्य के अंतरों को समझ सकें। इसमें शिक्षक शिक्षण के दौरान प्रस्तुतिकरण पर अधिक बल देता हैं।

जिससे छात्र उस प्रकरण के उद्देश्यों का बोध कर सकते है एवं उसे प्रकरण की घटनाओं एवं विचारों के पीछे के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों को जान सकें। बोध स्तर का शिक्षण का उपयोग सामान्यतः माध्यमिक स्तर के छात्रों हेतु अधिक किया जाता हैं।

3. चिंतन स्तर (Reflective Level) – यह शिक्षण के स्तर (Levels of Teaching) का आखिरी हिस्सा है। इसमें मुख्यतः उन छात्रों को सम्मिलित किया जाता है। जिनका स्मृति स्तर और बौद्धिक स्तर दोनों का विकास हो चुका हो। चिंतन स्तर का शिक्षण छात्रों को चिंतन करने में उनकी सहायता करता है।

यह छात्रों को वह क्षमता प्रदान करता है, जिससे छात्र प्रकरण के नकारात्मक एवं सकारात्मक (Negative and Positive) दोनों पहलुओं को समझ कर यह निर्णय ले सकें कि इस प्रकरण में अगर कुछ नए पात्रों और नए विचारों को सम्मिलित किया जाता है, तो प्रकरण के उद्देश्यों को किस तरह परिवर्तित किया जा सकता हैं।

● चिंतन स्तर के शिक्षण की विशेषताए Features of Reflective level teaching

1. चिंतन स्तर (Reflective Level) का शिक्षण छात्रों में समस्या-समाधान की प्रवृति का विकास करता हैं। जिससे वह भविष्य में आने वाली समस्याओं का समाधान निकालने हेतु तैयार हो सकें।

2. यह विद्यार्थियों के आलोचनात्मक पक्ष का विकास कार्य है, अर्थात यह छात्रों को यह समझने में उनकी सहायता करता है कि क्या सही है और क्या गलत।

3. यह छात्रों की चिंतन शक्ति का विकास कर उनमें सर्जनात्मकता के तत्वों का विकास करता हैं।

निष्कर्ष Conclusion –

आधुनिक शिक्षा की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह आवश्यक है कि शिक्षा की गुणवत्ता में जितनी हो सकें उतनी वृद्धि की जाए। जिससे गुणवान एवं बुद्धिमान नागरिकों का निर्माण हो और जिससे वह आपजी भावी जीवन मे अपने राष्ट्र के विकास में अपना सहयोग प्रदान कर सकें।

तो दोस्तों, आज आपने शिक्षण के स्तरों (Levels of Teaching in Hindi) से संबंधित जानकारी प्राप्त की एवं इसकी आवश्यकताओं एवं उपयोगिताओं को जाना। अगर आपको हमारी यह पोस्ट ज्ञानवर्धक लगी हो तो हमें कमेंट करके बताए साथ ही अपने दोस्तों के साथ भी इसे अवश्य सांझा करें।

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Pankaj Paliwal
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14 COMMENTS

  1. Hi sir mai bhi ek blogger banana chahata hoo
    Aur mai yek lekhak hoo. Mai kavitayen aur song likhata hoo .
    Kaise Banu
    Aur post kaise karoo. Aur yek blogger kaise banoo
    Please reply me sir.

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