District Institute of Education and Training (DIET) के उद्देश्य एवं कार्य

District Institute of Education and Training (DIET) की स्थापना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के सुझाव के आधार पर की गई थी। जिसमें यह घोषणा की गई थी कि प्रत्येक जनपद में एक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) की स्थापना की जाएगी। जिसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना होगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 के इस सुझाव के आधार पर 1987 में देश के सभी प्रान्तों के सभी जिलों में इस प्रकार के संस्थान स्थापित किये गए। वर्ष 2011 तक देश मे कुल 555 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) की स्थापना की जा चुकी हैं।

District Institute of Education and Training (DIET) hindi

इस संस्थान के माध्यम से जिला स्तर पर शिक्षा की व्यवस्था करने एवं उसकी गुणवत्ता में वृद्धि करने का प्रयास किया गया हैं। तो चलिए शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस संस्थान के उद्देश्यों एवं कार्यों के बारे में विस्तृत रूप से जानने का प्रयास करते हैं। District Institute of Education and Training in Hindi

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान |District Institute of Education and Training in Hindi

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान जिला स्तर पर अपना कार्य करता हैं। जिसमें इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा के स्तर में सुधार करना और शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार करना हैं। जिला स्तर पर DIET की स्थापना दो प्रकारों की जाती हैं- प्रथम मौजूदा प्राथमिक शिक्षक शिक्षा संस्थान के उन्नयन द्वारा और द्वितीय नए संस्थान स्थापित करना।

नए संस्थानों की स्थापना करने के लिए राज्य सरकार द्वारा संस्थान को भूमि उपलब्ध कराई जाती हैं, इसके अलावा संस्थान बनवाने एवं अन्य खर्चों की पूर्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती हैं। मानव संस्थान विकास मंत्रालय (MHRD) के निर्देशों के अनुसार किसी नवीन DIET की स्थापना करने के लिए उसे 10 एकड़ भूमि मोहया करानी चाहिए। इसके साथ ही संस्थान मे प्राचार्य कक्ष, स्टाफ कक्ष, प्राचार्य एवं स्टाफ के लिए आवासीय व्यवस्था, छात्रावास सुविधा, मनोविज्ञान प्रयोगशाला, विज्ञान प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब आदि की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

प्रत्येक District Institute of Education and Training (DIET) में Institute Clinic और डॉक्टरों की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि गंभीर समस्या से उसी समय निपटा जा सकें। प्रत्येक DIET में पुस्तकालय की व्यवस्था होनी चाहिए। जिसमें लगभग 10,000 पुस्तकें होनी चाहिए।

इसी के साथ किसी नए डाइट की स्थापना के लिए एक प्राचार्य, एक उपप्राचार्य, विभिन्न विभागों में 43 व्याख्यान एवं 15 अन्य कर्मचारियों की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

District Institute of Education and Training के उद्देश्य एवं कार्य

सामान्यतः शिक्षा के संबंधित किसी भी संस्थान या आयोग का गठन होना या करने के पीछे उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में वृद्धि करना एवं शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना होता हैं। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के उद्देश्यों एवं कार्यों को हम निम्न आधार पर समझ सकते हैं-

1. प्रारंभिक शिक्षा में गुणात्मक सुधार करने हेतु इस स्तर पर सेवा पूर्व शिक्षक शिक्षा की व्यवस्था करना।

2. प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सेवाकालीन प्रशिक्षण की व्यवस्था करना।

3. प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा संस्थाओं के प्रधानाध्यापकों के लिए Refresher Courses की व्यवस्था करना एवं सूक्ष्म योजना तैयार करना।

4. प्राथमिक, निरोपचारिक एवं प्रौढ़ शिक्षा के क्षेत्रों में शोध कार्य को करना।

5. जिला स्तर पर शैक्षिक योजनाओं का निर्माण करना और उन्हें लागू करवाना।

6. शैक्षिक प्रशासन एवं शैक्षिक सुधारों के विकेंद्रीकरण की व्यवस्था करना।

7. प्राथमिक शिक्षा में सार्वभौमिक कार्यक्रमों का आयोजन करना।

8. सामुदायिक कार्यकर्ताओं और अन्य संबंधित व्यक्तियों के लिए उनकी आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण कार्यक्रमों की व्यवस्था करना।

District Institute of Education and Training के विभाग

● सेवा पूर्व शिक्षक शिक्षा विभाग
● सेवारत कार्यक्रम, क्षेत्रीय अन्तःक्रिया एवं नवाचार समन्वय
● जिला संस्थान इकाई
● योजना एवं प्रबंधन
● पाठ्यक्रम शिक्षण सामग्री विकास एवं मूल्यांकन विभाग
● कार्यानुभव विभाग
● शैक्षिक तकनीकी विभाग

प्राथमिक शिक्षा और शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में District Institute of Education and Training (DIET) की भूमिका

1. इन संस्थाओं द्वारा प्राथमिक शिक्षा और शिक्षक शिक्षा के प्रशिक्षण की व्यवस्था करने का कार्य करती हैं।

2. यह प्राथमिक शिक्षकों के लिए Refresher Courses का आयोजन करवाती हैं इसके साथ ही शिक्षण हेतु शिक्षण सामग्री की व्यवस्था करती हैं।

3. यह संस्थाएं प्राथमिक शिक्षण शिक्षा के क्षेत्र में शोध का कार्य भी करती हैं एवं प्राथमिक स्तर के छात्रों की सहायता हेतु सॉफ्टवेयर बनाने का भी कार्य करती हैं।

4. यह संस्थाएं शिक्षण शिक्षा की समस्याओं को दूर करने एवं प्राथमिक स्तर के छात्रों के मूल्यांकन हेतु विधियों एवं प्रविधियों की खोज करती हैं।

5. इस प्रकार की संस्थाएं मानवीय संसाधनों का उपयोग शिक्षक शिक्षा एवं प्राथमिक छात्रों की शिक्षा की व्यवस्था करने हेतु उचित रूप से करती हैं।

निष्कर्ष – Conclusion

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 के सुझाव द्वारा गठित की गई संस्थाएं हैं। जिनका उद्देश्य जिला स्तर पर प्राथमिक शिक्षा और शिक्षक शिक्षा की उचित व्यवस्था करना हैं। इनका मुख्य कार्य या उद्देश्य जिले में शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि करना एवं शिक्षा को व्यापक बनाना हैं।

वर्तमान समय की हम बात करें तो कई ऐसे जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) हैं जहाँ 50% से अधिक पद खाली हैं। जिनको योग्य शिक्षक और कर्मचारी होने के बाद भी पूरा नहीं किया जा रहा। यह सब उचित नीति का क्रियान्वयन ठीक से न होना दर्शाता हैं। जिस कारण इस संस्था का मुख्य उद्देश्य पूर्ण रूप से पूरा नहीं हो पाता।

सरकार को चाहिए कि वह ऐसे संस्थानों को पुनः क्रिया में लाये एवं उन्हें उचित संसाधन मोहैया करवाया। जिससे वह शिक्षा के गुणवत्ता के कार्य मे तीव्र गति से अग्रसर हो सकें। तो दोस्तों आज आपने जाना कि जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के उद्देश्य एवं कार्य क्या हैं? (District Institute of Education and Training in Hindi) हम आशा करते हैं कि आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई हो। अपने विचारों को व्यक्त करने हेतु कमेंट बॉक्स का उपयोग करें।

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नमस्कार दोस्तों मेरा नाम पंकज पालीवाल है, और मैं इस ब्लॉग का फाउंडर हूँ. मैंने एम.ए. राजनीति विज्ञान से किया हुआ है, एवं साथ मे बी.एड. भी किया है. अर्थात मुझे S.St. (Social Studies) से जुड़े तथ्यों का काफी ज्ञान है, और इस ज्ञान को पोस्ट के माध्य्म से आप लोगों के साथ साझा करना मुझे बहुत पसंद है. अगर आप S.St. से जुड़े प्रकरणों में रूचि रखते हैं, तो हमसे जुड़ने के लिए आप हमें सोशल मीडिया पर फॉलो कर सकते हैं।

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