एक धुर्वीय विश्व (Unipolar World) क्या हैं?

एक धुर्वीय विश्व Unipolar World एक ऐसा विश्व हैं जिसमें किसी विश्व में एक ही महाशक्ति हो अर्थात विश्व की राजनीति में जब किसी एक ही महाशक्ति का वर्चस्व स्थापित हो जाता हैं तो ऐसे विश्व को एक धुर्वीय विश्व कहा जाता है।

इस प्रकार समस्त शक्तियों का केंद्रीकरण हो जाता है और समस्त देश एक देश के ही इर्द-गिर्द घूमते हैं अर्थात एक ही देश की तानाशाही विश्व में व्याप्त हो जाती हैं तो दोस्तों आज हम यही विस्तार से जनिंगे की एक धुर्वीय विश्व (Unipolar World) क्या हैं और इसके उत्त्पत्ति के कारण?

एक धुर्वीय विश्व (Unipolar World) क्या हैं?

एक धुर्वीय विश्व (Unipolar World) क्या हैं?

जब विश्व के देशों में से किसी देश के अत्यधिक शक्ति हो जाती हैं तो वह अपने निर्णयों से समस्त देशों की स्थिति को प्रभावित करने का कार्य करता हैं और समस्त देश उस देश से मित्रता करने को काफी उत्सुक होते हैं अगर हम वर्तमान समय की बात करें और देखें तो लगता है कि शीत युद्ध के पश्चात विश्व एक धुर्वीय विश्व की ओर बढ़ रहा हैं क्योंकि विश्व में अमेरिका ही एक ऐसी महाशक्ति हैं जो अपनी शक्तियों (सैन्य शक्ति, विज्ञान शक्ति और तकनीकी) से दुनिया को प्रभावित कर रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघ UNO में अमेरिका के बढ़ते वर्चस्व को यह साफ हो जाता हैं कि विश्व एक धुर्वीय प्रक्रिया (Unipolar World) की ओर अग्रसर हो रहा हैं इस बात का तथ्य हमें अक्सर दिखाई देता हैं।

सुरक्षा परिषद में फ्रांस के विरोध के पश्चात भी कॉफी को महासचिव बनाना इस बात का उदाहरण हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ का झुकाव अमेरिका की तरफ ज्यादा रहता हैं वर्तमान समय में कोई भी देश अमेरिका से दुश्मनी करना नहीं चाहता क्योंकि शीत युद्ध की समाप्ति के पश्चात वह महाशक्ति के रूप में उभरा है परंतु यह पूर्ण रूप से कहना गलत होगा कि विश्व पूर्ण रूप से एक धुर्वीय विश्व हो गया हैं।

एक धुर्वीय विश्व के उत्त्पत्ति के कारण –

दोस्तों एक धुर्वीय विश्व का सबसे बड़ा कारण सोवियत संघ का विघटन माना जाता हैं। जिसके पश्चात संयुक्त राष्ट्र संघ ही एक मात्र ऐसी शक्ति थी जो विश्व की राजनीति को प्रभावित करने में समर्थ थी। जो वैश्वीकरण का एक महत्वपूर्ण केंद्र मानी जाती थी।

माना जाता हैं कि 1991 में सोवियत संघ के विघटन के पश्चात अमेरिका ही एकमात्र महाशक्ति के रूप में उभरा और उसी ने विश्व के परिप्रेक्ष्य को अपनी नीतियों के हिसाब से नियंत्रण किया। जिससे विश्व का एक ध्रुव की ओर झुकाव हो गया।

द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका का हिरोशिमा और नाकासाकी पर परमाणु जैसे शक्तिशाली हथियारों से आक्रमण उसकी शक्ति को प्रदर्शित करता हैं। अमेरिका ने ऐसे भयानक हथियारों का निर्माण कर लिया था जो पूरे विश्व को नष्ट कर सकते थे। इन हथियारों को देख पूरा विश्व मे अमेरिका एक शक्तिशाली देश के रूप में उभरा और वही रूस ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि मित्र राष्ट्रों में होने के पश्चात भी उसने हमसे इन हथियारों की सूचना के बारे में छुपाया। जिससे वह महाशक्ति बन सकें और विश्व में एकमात्र शक्ति के रूप में अपनी पहचान बनाये।

यहीं से फिर शीत युद्ध 1945-91 का जन्म हुआ और नाटो, वारसा और गुटनिरपेक्ष जैसे गुटों का जन्म हुआ सभी देश इन तीनों गुटों से जुड़ने लगे और एक दूसरे गुटों का विरोध करने लगें। परंतु 1991 में सोवियत संघ (वारसा) का विघटन हो गया और अमेरिका ही एकमात्र शक्तिशाली देश के रूप में उभरा और विश्व एक धुर्वीय विश्व की ओर बढ़ने लगा।

निष्कर्ष –

यह कहना सही होगा कि वर्तमान में अमेरिका को महाशक्ति के रूप में देखा व समझा जाता हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) में उसके वर्चस्व और विज्ञान प्रौद्योगिकी में उसकी शक्तियों को देखकर हम उसे महाशक्तिशाली देश के रूप में देख सकते हैं परंतु पूर्ण रूप से यह समझ लेना कि विश्व एक धुर्वीय विश्व हैं यह कहना गलत होगा क्योंकि रूस, चीन, जापान, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे कई शक्तिशाली देश हैं जो लगातार अपनी शक्तियों में वृद्धि कर रहें हैं। तो दोस्तों आज आपने जाना कि एक धुर्वीय विश्व क्या हैं Unipolar World in Hindi और इसकी उत्त्पत्ति के कारण। अगर आपको यह पोस्ट ज्ञानवर्धक लगी हो तो इसे शेयर करें अपने दोस्तों के साथ और सुझाव हेतु कमेंट करके बताए।

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