शिक्षण विधियां – Teaching Methods in Hindi

शिक्षण विधियां Teaching Methods वह विधियां है जिनकी सहायता से एक शिक्षक कक्षा में पठन-पाठन का कार्य प्रारंभ एवं सम्पन्न करता है। शिक्षण विधि के अनुसार ही कक्षा में शिक्षण और छात्रों के मध्य अंतःक्रिया होती हैं। शिक्षक जितनी कुशलता से शिक्षण-विधि का प्रयोग करता है कक्षा में उतना ही अच्छा पर्यावरण उत्त्पन्न होता है और शिक्षण-अधिगम (सिखना) प्रक्रिया प्रभावशाली होती हैं।

शिक्षण विधि पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या को “कैसे पढ़ाया जाए” (How to Teach) के प्रश्न का सही उत्तर हैं। यह किसी विषय या प्रकरण (Topic) को छात्रों तक पहुँचाने हेतु एक उत्तम एवं प्रभावशाली नीति व नियमों का निर्माण करती है। शिक्षण विधि को शैक्षिक तकनीकी,शैक्षिक उपकरण का ही एक हिस्सा माना जाता हैं। शिक्षा एक सामाजिक प्रक्रिया है जिस कारण शिक्षण विधियों का निर्माण या उपयोग भी सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ही किया जाता हैं।

शिक्षण विधियों की विशेषताएं Characteristics of Teaching Methods

शिक्षण विधियां (Teaching Methods) क्या हैं?

1. शिक्षण विधियों का उपयोग छात्रों तक सही एवं स्पष्ट तरीके से पाठ्यक्रम के संचालन हेतु किया जाता हैं।

2. शिक्षण विधियों में शिक्षण के उद्देश्यो से अधिक पाठ्यक्रम के उद्देश्यों को अधिक महत्व प्रदान किया जाता हैं।

3. शिक्षण विधियों में शिक्षण की उप-विधियां की भी उचित सहायता ली जाती हैं।

4. शिक्षण विधियों का उपयोग छात्रों एवं शिक्षण के मध्य अंतःक्रिया के दौरान किया जाता हैं।

5. किसी प्रकरण को कैसे पढ़ाया है, किस तरह पढ़ाना है या छात्रों तक कैसे पहुँचाना है इन सभी का उत्तर शिक्षक को इन विधियों द्वारा ही मिलता हैं।

6. शिक्षण विधियों में प्रयोगात्मक कार्यो एवं प्रस्तुतिकरण को अधिक महत्व दिया जाता हैं।

शिक्षण विधियों के प्रयोग का महत्व एवं उपयोगिता Importance of using Teaching Methods

1. इसके प्रयोग से छात्रों के ज्ञान में स्थायित्व का भाव लाया जा सकता हैं।

2. इसके प्रयोग से छात्र प्राप्त ज्ञान का समय आने पर पुनः स्मरण कर सकते हैं।

3. यह प्रकरण एवं विषय की जटिलताओं को कम करने का कार्य करती हैं।

4. शिक्षण विधि के प्रयोग से कक्षा अनुशासन में रहती हैं।

5. इसके प्रयोग से छात्र और अध्यापक के मध्य मधुर संबंधों का निर्माण होता हैं।

6. विधियों का सही तरह एवं कुशलता के साथ उपयोग करने से प्रकरण या पाठ्यक्रम की तरफ छात्रों की रुचि में वृद्धि की जा सकती हैं।

7. इसके प्रयोग हेतु छात्र का मानसिक,बौद्धिक एवं आध्यात्मक विकास एक साथ किया जा सकता हैं।

जानें – शिक्षण सहायक सामग्री (TLM) क्या हैं?

शिक्षण के दौरान उपयोग की जाने वाली मुख्य शिक्षण विधियां Types of Teaching methods

किस शिक्षण विधि का उपयोग कहाँ, कैसे और किस तरह करना है यह शिक्षक की कुशलता पर निर्भर करता है। शिक्षण विधियां teaching methods कई प्रकार की होती है जैसे- व्याख्यान विधि,प्रदर्शन विधि, व्याख्यान प्रदर्शन विधि,प्रश्नोत्तर विधि आदि।

व्यख्यान विधि Lecture method – यह वह विधि है जिसका प्रयोग प्रत्येक शिक्षक प्रकरण को स्पष्ट करने हेतु करता है। इस विधि का उपयोग शिक्षक कक्षा के बाहर भी कर सकता है। यह विधि प्राचीन विधि है। प्राचीन काल मे गुरुकुलों में गुरु अपने शिष्यों को प्राकृतिक वातावरण में बैठकर इसी विधि का उपयोग किया करते थे। यह विधि सबसे सरल मानी जाती है इस विधि का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे कक्षा अनुशासन में रहती हैं।

प्रदर्शन विधि Demonstration methods – प्रदर्शन विधि शिक्षक को व्याख्या करने हेतु उसकी सहायता करती है और छात्रों को स्पष्ट रूप से समझाने में भी शिक्षक की सहायता करती है। प्रदर्शन विधि में शिक्षक छात्रों के मध्य प्रकरण से संबंधित दृश्यों को प्रकट करता है और साथ ही वो दृश्य दिखाकर छात्रों को स्पष्ट भी करते रहता है जिससे छात्र प्रकरण में रुचि लेते है और उनका ज्ञान स्थायी होता है यह एक मनोवैज्ञानिक विधि हैं।

प्रश्नोत्तर विधि Questions-Answer methods – इस विधि का प्रतिपादन प्लेटो के गुरु सुकरात द्वारा किया गया था। प्रश्नोत्तत विधि द्वारा छात्रों के चिंतन स्तर का विस्तार किया जाता है और यह छात्रों की पुनः स्मरण शक्ति का भी विकास करती है। इसके प्रयोग से कक्षा अनुशासन में रहती है साथ ही यह प्रकरण को लेकर छात्रों की रुचि बढ़ाने का भी कार्य करती हैं।

इसके प्रयोग से छात्रों के मध्य की व्यक्तिगत भिन्नता (Individual differences) को पहचान कर छात्रों में भेद (मेधावी,औसत,निम्न) किया जा सकता है। जिससे शिक्षण की गुणवत्ता एवं लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है जिससे शिक्षण की गुणवत्ता एवं लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता हैं। यह शिक्षण विधि teaching methods की सबसे अधिक उपयोग की जाने वाकई विधियी में से एक हैं।

आगमन विधि Inductive method – इस विधि का प्रतिपादन राजनीति के गुरु एवं जनक अरस्तू द्वारा किया गया था। आगमन विधि में शिक्षण कार्य प्रारंभ करने या प्रकरण की शुरुआत करने से पूर्ण छात्रों म् मध्य पूर्वज्ञान से संबंधित उदाहरण प्रस्तुत किये जाते है जिससे पढ़ाये जाने वाले प्रकरण तक पहुँचा जाता है अर्थात यह विधि ज्ञात से अज्ञात की ओर बढ़ती हैं।

निगमन विधि Deductive method – निगमन विधि का प्रतिपादन अरस्तू के गुरु प्लेटो द्वारा किया गया था। यह विधि आगमन विधि के विपरीत है यह विधि अज्ञात से ज्ञात की ओर बढ़ती है। इसमें सर्वप्रथम छात्रों के मध्य किसी सूत्र या किसी सिद्धांत को प्रस्तुत किया जाता है तत्पश्चात छात्रों को उस स्तर पर ले जाया जाता हैं।

जिससे छात्र परिचित हो अर्थात इस विधि में छात्रों को सिद्धांतो के बारे में बताया जाता है तत्पश्चात उसके अर्थो को स्पष्ट किया जाता है। इस विधि को दर्शनशास्त्र के आधार के रूप में भी देखा जाता है। इस विधि में छात्रों को सामान्य से विशिष्ट, ज्ञान से अज्ञात और सूक्ष्म से स्थूल की ओर ले जाया जाता हैं।

खेल विधि Game method – आधुनिक समय मे प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने हेतु बालको एवं शिशुओं को खेल-खेल में शिक्षा प्रदान करवाई जाती है। इस विधि के प्रतिपादक के रूप में हेनरी फोल्डवेल कुक को देखा जाता है। यह रुचिकर विधि है इसमें बालक अपनी पूर्ण रुचि प्रकट करता है जिसके कारण प्राप्त ज्ञान को स्थायित्व प्रदान होता है और छात्र लंबे समय तक उस ज्ञान का भंडारण अपने मस्तिष्क में कर सकते हैं।

निष्कर्ष Conclusion –

शिक्षण विधियां (teaching methods) वह साधन है जिसके उचित उपयोग से शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकता है और शिक्षा के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों की पूर्ण रूप से प्राप्ति की जा सकती है। शिक्षण विधि आधुनिक शिक्षा की नवीन आवश्यकता है। वर्तमान परिस्थितियों में समय-समय पर शिक्षण के तरीकों में बदलाव किया जाना बेहद आवश्यक है परंतु समस्त शिक्षण विधियों का लाभ तभी है जब शिक्षक उसका प्रयोग अपनी कुशलता के अनुरुप करें।

अन्यथा शिक्षा का स्तर बढ़ने की बजाय घटता रहेगा। तो दोस्तों आज आपने जाना कि शिक्षण विधि क्या हैं (Teaching methods in hindi) और इसके लाभ। दोस्तों आपको हमारी यह पोस्ट ज्ञानवर्धक लगी हो तो इसे अपने मित्रों के साथ भी अवश्य शेयर करें ताकि वह भी शिक्षण विधि से संबंधित ज्ञान प्राप्त कर सकें। धन्यवाद।।

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नमस्कार दोस्तों मेरा नाम पंकज पालीवाल है, और मैं इस ब्लॉग का फाउंडर हूँ. मैंने एम.ए. राजनीति विज्ञान से किया हुआ है, एवं साथ मे बी.एड. भी किया है. अर्थात मुझे S.St. (Social Studies) से जुड़े तथ्यों का काफी ज्ञान है, और इस ज्ञान को पोस्ट के माध्य्म से आप लोगों के साथ साझा करना मुझे बहुत पसंद है. अगर आप S.St. से जुड़े प्रकरणों में रूचि रखते हैं, तो हमसे जुड़ने के लिए आप हमें सोशल मीडिया पर फॉलो कर सकते हैं।

5 COMMENTS

  1. आपका यह सामाजिक विज्ञान। शिक्षण विधि सरल भाषा शेलीयो में लिखा गया है जो हमको बहुत ही अच्छा लगा । धन्यवाद ।

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