सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud in Hindi)

सिगमंड फ्रायड Sigmund Freud का जन्म ऑस्ट्रेलिया में 6 मई 1856 को हुआ था। यह एक सामान्य परिवार से संबंधित थे। इनके पिता का नाम जैकोब फ्रायड और इनकी माता का नाम अमलिया फ्रायड था। यह अपने शैशवास्था से ही बहुत स्वतंत्र विचारों के थे क्योंकि इनके परिवार द्वारा इन्हें बहुत प्रेम एवं स्वतंत्रता प्रदान की गई थी।

यह अपने पिता की दूसरी धर्मपत्नी की संतान थे यह बाल्यावस्था से ही बुद्धिवान थे कक्षा में इनका स्थान सदैव सर्वोच्च रहता था। इन्होंने अपने शैक्षिक कार्यकाल में काफी उपलब्धियां प्राप्त की इन्होंने मात्र 6 वर्ष की अवस्था मे ही 8 भाषाओं का ज्ञान प्राप्त कर लिया था।

इन्होंने मन विश्लेषण सिद्धांत, यौन व्यवहार सिद्धांत एवं Talking treatment theory दी इनके अनुसार व्यक्ति से बात करके ही उसका मानसिक इलाज किया जा सकता हैं यह ऐसे प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने इस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। जिसे आज विश्वभर में स्वीकृत कर इसका इलाज करने हेतु उपयोग किया जाता हैं।

सिगमंड फ्रायड sigmund freud के यह तीनों सिद्धांत काफी चर्चा में रहें और इनकी Sexual Behaviour theory जिसमे इन्होंने स्तनपान करने एवं अपना अंगूठा चूसने वाली बालक की क्रिया को काम भावना से जोड़कर एक नए सिद्धांत का प्रतिपादन किया जिसको समाज मे काफी आलोचना का सामना करना पड़ा।

सिगमंड फ्रायड के अनुसार मनुष्य के मानव स्वभाव की उत्त्पत्ति तीन तत्वों से हुई है।

1- इद् Id
2- अहम Ego
3- परम् अहम Super Ego

सिगमंड फ्रायड Sigmund Freud कौन थे?

वहीं सिगमंड फ्रायड के अनुसार मनुष्य का आंतरिक मन एवं उसकी बुद्धि के कार्य करने का आधार तीन प्रकार के हैं- चेतन, अचेतन और अर्द्धचेतन। तो चलिए विस्तार से जानें कि मनोविज्ञान के विचारों का विकास करने वाले सिगमंड फ्रायड के मुख्य विचार क्या थे?

सिगमंड फ्रायड के मुख्य विचार Key ideas of Sigmund Freud

जैसा कि हमने आपको बताया कि सिगमंड फ्रायड को मनोविज्ञान के केंद्र में स्थान दिया गया हैं क्योंकि इन्होंने ही मनोविज्ञान के सिद्धांतों का विकास करने एवं उच्च स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। तो आप समझ सकते है कि मनोविज्ञान के समस्त विचारों एवं सिद्धांतो के विकास हेतु इनके विचारों की क्या भूमिका रही होगी तो चलिए आज सिगमंड फ्रायड के इन विचारों का गहन अध्ययन करें।

जिनमें मनुष्य निर्माण के तीन तत्व इद् Id, अहम Ego, परा अहम Super Ego और मनुष्य के मस्तिष्क के तीन पहलु चेतन Conscious, अचेतन Unconscious, और अर्द्धचेतन Semi conscious सम्मिलित हैं।

चेतन (Conscious) – फ्रायड इस अवस्था को ऐसी अवस्था मानते है जिसमें व्यक्ति सजक होकर बिना किसी विचारों के द्वन्द के सही निर्णय एवं एक स्पष्ट निर्णय के साथ किसी कार्य को करें तो वह व्यक्ति का चेतन मन कहलाता हैं। यह बालक को स्पष्ट रूप से संकेत देने का कार्य करता है और उसे शुद्ध एवं स्पष्ट निर्णय लेने हेतु मनुष्य की सहायता करता हैं।

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अचेतन (Unconscious) – सिगमंड फ्रायड व्यक्ति के अचेतन मन को बहुत महत्व देते थे फ्रायड के अनुसार व्यक्ति के मन या मस्तिष्क के बहुत बड़े भाग के रूप में उसका अचेतन मन हैं जिसमें उसकी काम भावना निवास करती है फ्रायड के अनुसार व्यक्ति को शारीरिक तृप्ति द्वारा सुख की अनुभूति प्राप्त होती है इसलिए उनके इस सिद्धांत को सुखवादी सिद्धांत (Hedonistic Principle) भी माना जाता हैं।

फ्रायड के अनुसार व्यक्ति के अचेतन मन समस्त कु-विचारों का भंडार है। फ्रायड के अनुसार व्यक्ति के चेतन,अर्द्धचेतन मन मे सभी विचार व्यक्ति के अचेतन मन से ही आते है। फ्रायड व्यक्ति के इस मन को केंद्र के रूप में स्वीकार करते है एवं इसे बहुत महत्व देते हैं।

अर्द्धचेतन (Semi conscious) – सिगमंड फ्रायड के अनुसार व्यक्ति अर्द्ध सक्रिय होकर जो कुछ भी सोचता है या विचार करता है वह सभी उसके अर्द्धचेतन मन का भाग है अर्थात व्यक्ति के विचारों में अस्पष्टता एवं किसी कार्य को लेकर दो विचारों के उत्त्पन्न होने का कारण अर्द्धचेतन मन हैं। इस अवस्था में व्यक्ति के अंदर विचारों में द्वंदता आ जाती है जो उसे किसी कार्य को करने से पूर्व उसे सोचने में विवश करती हैं।

सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) ने इन तीन (चेतन,अचेतन और अर्द्धचेतन) आधार पर व्यक्तित्व निर्माण के तीन तत्वों का निर्माण किया है जो इस प्रकार हैं।

● इद् Id – फ्रायड के इद् से आशय अचेतन मन के सभी अधरों से हैं अर्थात फ्रायड की sexual behavior theory से संबंधित सभी विचार इद् Id के अंतर्गत आते है इनके अनुसार इसका निर्माण बालक के जन्म से ही हो जाता है जब शिशु माँ का स्तनपान करता है या अपने अंगूठे को चूसता है यह सभी उसकी काम भावना को जाग्रत करने या दर्शाने की क्रिया होती हैं।

सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के इन्हीं विचारों की आलोचना सबसे अधिक होती है आलोचकों के अनुसार फ्रायड मस्तिष्क के विचारों को नही बल्कि अपने स्वयं के विचारों को प्रकट करने का कार्य करता है। फ्रायड के अनुसार इद् id के विचारों का जन्म मनुष्य के जन्म से ही हो जाता हैं।

● अहम् Ego – फ्रायड के अनुसार मनुष्य का अहम् ego तत्व अर्द्धचेतन (Semi conscious) मन है यह व्यक्ति के विचारों को नियंत्रण कर उसमें अंकुश लगाने का कार्य करता है अर्थात जब व्यक्ति कोई गलत कार्य करने की सोचता है तो उसके मन मे एक आंतरिक विचार आते है जो उसे उस गलत कार्य को ना करने के लिए उसे प्रेरित करते है। इसमें मनुष्य के भीतर दो विचारों की उत्त्पत्ति एक साथ हो जाती है जिसे मानसिक द्वंद (Mental Conflict) भी कहते हैं।

● परा-अहम् Super ego – सिगमंड फ्रायड के अनुसार परा-अहम् व्यक्ति के नैतिक सिद्धांतो (Moral principles) पर आधारित है अर्थात इसमें चेतन मन के समस्त गुणों का समावेश होता है जिसमे वह स्पष्ट एवं सही निर्णयों के चयन कर उसमें कार्य करता हैं।

निष्कर्ष (Conclusion) –

सिगमंड फ्रायड Sigmund Freud के सभी विचारों को एक बेहद महत्वपूर्ण इकाई के रूप में देखा जाता है परंतु फ्रायड के अनुसार व्यक्ति का अचेतन मन सभी प्रकार के (चेतन,अर्द्धचेतन) मन को नियंत्रित करता है और वह इसको सबसे महत्वपूर्ण स्थान देते है। अतः व्यक्ति का अचेतन मन ही सर्वश्रेष्ठ हैं। सिगमंड फ्रायड एक ऐसे व्यक्ति थे जो अपनी मृत्यु के बाद ज्यादा प्रसिद्ध हुए और इनके विचारों के क्षेत्र में व्यापकता आयी।

सिगमंड फ्रायड मनोविज्ञान के प्रणेता होने के साथ-साथ एक अच्छे दार्शनिक और दूरदर्शी भी है तो दोस्तों आज आपने जाना कि सिगमंड फ्रायड कौन थे? (Sigmund Freud in Hindi) अंत में अगर आपको इनके संबंध में जानकर आपके ज्ञान में वृद्धि हुई हो और आपको यह लाभदायक लगी हो तो इसे अपने अन्य मित्रों के साथ भी जरूर शेयर करें।

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2 COMMENTS

  1. श्रीमान आपने फ्रायड सिद्धान्त का लघु विश्लेषण बहुत अच्छे से किया है,
    जो मुझे व्यक्तिगत तौर पर बहुत पसंद आया।

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