नैतिक मूल्य | Moral Values in Hindi

नैतिक मूल्य (Moral Values) को आदर्शवादी तत्वों का समूह माना जाता हैं अर्थात नैतिक मूल्य वह हैं जो व्यक्ति के भावात्मक पहलुओं में निवास करती हैं। व्यक्ति में निहित आदर्श विचार,आदर्श आचरण एवं संस्कृति व सभ्यता के विभिन्न तत्वों को एकीकृत कर इसका वर्णन किया जाता हैं।

छात्रों में इनका विकास परिवार,विद्यालय एवं समाज द्वारा किया जाता हैं। छात्र अपने नैतिक मूल्यों का विकास प्रायः किसी का अनुकरण करके करते हैं अर्थात नकल। दोस्तों आज हम इसी संबंध में जनिंगे कई नैतिक मूल्य क्या हैं। What is Moral Values.

नैतिक मूल्य क्या हैं | What is Moral Values in Hindi

नैतिक मूल्य को सामान्यतः आदर्श संस्कारो के रूप में देखा जाता हैं अर्थात अपने से बड़ो का सम्मान करना,अपने माँ-बाप की सेवा करना,गुरुजी की आज्ञा का पालन करना,पूजा-पाठ करना,अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना आदि। इन सभी को नैतिक मूल्यों के रूप में ही देखा जाता रहा हैं।

विद्यालय में प्रायः छात्रों को ईमानदारी, देश-भक्ति,लालच एक बुरी बला जैसी अनेकों कहानियां सुनाई जाती हैं ताकि उनमें ऐसे भाव उत्त्पन्न हो और उनमें नैतिक मूल्यों का विकास हो सकें। इसके विकास से छात्र आदर्श नागरिक बनते हैं एवं राष्ट के विकास एवं उसकी पहचान बनाने का कार्य करते हैं।

जैसा कि हम सभी जानते है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और जो मूल्य या तत्व उसे समाज के साथ समायोजन करने में उसकी सहायता करते है एवं उसे गुणवान और आज्ञाकारी बनाते हैं।

moral values kya hai

नैतिक मूल्य की विशेषता | characteristics of Moral Values

1) यह परिवर्तनीय होते हैं, मानव की संगत एवं पर्यावरणीय परिप्रेक्ष्य में बदलाव आने से उनके नैतिक मूल्यों में भी बदलाव आता हैं।

2) यह आचरण बद्ध होते हैं एवं सदैव सकारात्मक पक्ष की ओर इनका झुकाव होता हैं।

3) इनका विकास अनुकरणीय पद्यति द्वारा होता है अर्थात इनके समस्त गुणों को व्यक्ति दुसरो को देखकर या दूसरों के विचार सुनकर प्राप्त करता हैं।

4) इनका विकास धार्मिक शिक्षा,सामाजिक शिक्षा,मानवता की शिक्षा द्वारा किया जाता हैं।

5) यह भावात्मक पक्ष का एक पहलू है, जिसका उद्देश्य भावात्मक पक्ष को मजबूत करना एवं छात्रों के संवेगों को दिशा प्रदान करना होता हैं।

नैतिक मूल्यों का विकास कैसे करें?

नैतिक मूल्यों moral values का विकास करने हेतु उनके मस्तिष्क में उस वातावरण का निर्माण करना आवश्यक होता हैं, अर्थात छात्रों को बचपन में दया-करुणा जैसी संवेगों से भरपूर कहानियां सुनाई जाती है। जिससे उनमें दूसरों के प्रति दया-करुणा का भाव उत्पन्न हो सकें।

अगर आप अपने नैतिक-मूल्यों का विकास करना चाहते हैं, तो आपको चाहिए कि आप दर्शनवादी बनें अर्थात किसी भी निर्णय में पहुचने से पुर्व उस विषय में विचार-विमर्श करें तत्पश्चात अपने भावों एवं विचारों को सबके सामने प्रस्तुत करें।

निष्कर्ष Conclusion

वर्तमान में स्वार्थ,घृणा,ईर्ष्या,हिंसा जैसे भाव ज्यादा देखने को मिलते हैं, जिससे मानवता के विकास में कमी साफ तौर पर देखी जा सकती हैं। ऐसे में राष्ट्र एवं छात्रों के उन्नत भविष्य हेतु यह आवश्यक हैं कि बालकों में नैतिक-मूल्यों के विकास में वृद्धि करने के निरंतर प्रयास किये जायें।

तो दोस्तों, आज आपने जाना कि नैतिक मूल्य क्या हैं? (Moral Values in Hindi) अगर आपको हमारी पोस्ट पसंद आई हो तो इसे शेयर करें और अपने व्यक्तित्व में सम्मिलित किसी विशेष नैतिक मूल्य को हमें कमेंट करके बताए।

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