शैक्षिक समाजशास्त्र – Educational Sociology in Hindi

शैक्षिक समाजशास्त्र Educational Sociology शिक्षा और समाज, दो शब्दों से मिलकर बना होता है जिसका अर्थ होता है समाजशास्त्र में शिक्षा या शिक्षा में समाजशास्त्र का समावेश। जॉर्ज पैनी (E. George peyne ) को शैक्षिक समाजशास्त्र का जनक माना जाता हैं।

शिक्षा में समाज के गुणों एवं उसके तत्वों को सम्मिलित करके जिस शिक्षा का निर्माण होता है उसको हम शैक्षिक समाजशास्त्र कहते हैं शैक्षिक समाजशास्त्र में उन सभी सिद्धान्तों को अपनाया जाता है जो शिक्षा के सिद्धान्तो में अपनाया जाता हैं।

शैक्षिक समाजशास्त्र Educational Sociology –

शिक्षा का समाज के साथ सम्बन्ध सदियों से चला आ रहा है फिर हम चाहे वैदिक काल की बात करें या बौद्ध काल, मुस्लिम काल या ब्रिटिश काल जिस काल की शिक्षा जिस काल मे थी उस काल के समाज का प्रभाव उनकी शिक्षा में सामान्य रूप से देखा जाता था और शिक्षा का अर्थ भी उसी रूप में देखा वे समझा जाता था और सबसे महत्वपूर्ण बात शिक्षा का पाठ्यक्रम और शिक्षा के उद्देश्य भी उस काल के समाज की विचारधारा एवं उस समय की समाज की आवश्यकता के अनुरूप ही निर्धारित होती थी।

Educational Sociology in hindi
( E. George Payne )


जैसा कि आप जानते है किसी समाज की शिक्षा अच्छी और ज्ञानवान होगी तो वो समाज भी सभ्य,संस्कारी,शिक्षित एवं उस समाज से मौलिक गुणों का समावेश होगा पर यह सब तभी संभव है जब उस समाज मे शिक्षा व्याप्त हो अन्यथा वह समाज भ्रष्टाचार , दरिद्रता , अज्ञानता से युक्त होगा।
दोस्तों शैक्षिक समाजशास्त्र इसीलिए एक विषय के रूप में भी जरूरी है ताकि छात्रों को उनके समाज का ज्ञान भली-भांति हो सकें एवं वह उस समाज के हिसाब से अपने व्यवहार में उचित परिवर्तन कर सकें।

शैक्षिक समाजशास्त्र की परिभाषायें Definition of Educational Sociology –

हेनसन के अनुसार ” उनके अनुसार शैक्षिक समाजशास्त्र शिक्षा तथा समाज के बीच के संबंधों का वर्णन करता हैं।”

जॉर्ज पायने के अनुसार ” शैक्षिक समाजशास्त्र से हमारा अर्थ उस विज्ञान से है जो संस्थाओं सामाजिक समूहों ओर सामाजिक क्रम क्रियाओ अर्थात सामाजिक संबंधों जिनमें तथा जिनके द्वारा व्यक्ति अपने अनुभवों को प्राप्त और संगठित करता है।”

ब्राउन के अनुसार ” शैक्षिक समाजशास्त्र व्यक्ति तथा उसे संस्कृति वातावरण के बीच होने वाली अंतर्क्रिया का अध्ययन हैं।”

शैक्षिक समाजशास्त्र के उद्देश्य Objectives of Educational Sociology –

  1. विद्यालय को समाज के साथ जोड़ना एव समाज की आवश्यकता के अनुरूप छात्रों को तैयार करना।
  2. शिक्षा को प्रभावित करने वाली सामाजिक समस्याओं की पहचान करना एवं उसका समाधान निकालना ।
  3. सामाजिक विषय पड़ते समय विद्याथियों में होने वाले उचित अनुचित परिवर्तनों को समझना।
  4. समाज की आवश्यकताओ की पूर्ति हेतु विभिन्न अनुशंधान करना एवं उत्पन्न समस्याओ का समाधान करना।
  5. लोकतंत्र को मजबूत करना एवं छात्रों को लोकतंत्र का ज्ञान देना
  6. राज्य के लिए उत्तम नागरिक तैयार करना।
  7. छात्रों को मौलिक अधिकारों का ज्ञान प्रदान करना।
  8. छात्रों में सहयोग की भावना का विकास करना।
  9. छात्रों को भविष्य की समस्याओं के समाधान का सामना करने की शिक्षा प्रदान करना।
  10. छात्रों में सामाजिक दृष्टिकोण उत्पन्न करना।

शैक्षिक समाजशास्त्र की प्रकर्ति Nature of Educational Sociology –

  • शैक्षिक समाजशास्त्र में समाज मे उत्त्पन्न समस्याओ को खोजा जाता है।शैक्षिक समाजशास्त्र में सामाजिक समस्याओं का समाधान निकाला जाता हैं।
  • शैक्षिक समाजशास्त्र में सामाजिक परिवर्तनों को उचित दिशा प्रदान की जाती हैं।
  • शैक्षिक समाजशास्त्र सकारात्मक सोच से प्रभावित हैं।
  • शैक्षिक समाजशास्त्र शिक्षा और समाज मे एक प्रकार का संबंद्ध स्थापित करता हैं।
  • शैक्षिक समाजशास्त्र भूतकाल को वर्तमान से एवं वर्तमान को भविष्यकाल से जोड़ता हैं।
  • शैक्षिक समाजशास्त्र मानव का भी अध्ययन करता है।
  • यह व्यक्तियों के व्यवहार संबंधित अध्ययन भी करता है तथा उनमें आने वाले परिवर्तनों का भी शोध करता हैं।
  • शैक्षिक समाजशास्त्र वस्तुनिष्ट विषय के रूप में देखा वे समझा जाता हैं।
  • शैक्षिक समाजशास्त्र औपचारिक अनोपचारिक दोनों प्रकार का होता हैं।

शैक्षिक समाजशास्त्र की आवश्यकता एवं महत्व

  • शैक्षिक समाजशास्त्र में सामाजिक समस्याओं को समझते हुए शिक्षा के पाठ्यक्रम का निर्माण किया जाता है।
  • शैक्षिक समाजशास्त्र शिक्षण विधियों के निर्माण में भी सहायक हैं।
  • शैक्षिक समाजशास्त्र शिक्षण सहायक सामग्री Teaching Learning Material के निर्माण में भी अपनी उचित भूमिका निभाता हैं।
  • शैक्षिक समाजशास्त्र विद्यालयो को समाज के साथ जोड़ता हैं।
  • शैक्षिक समाजशास्त्र समाज की आवश्यकताओ एव समस्याओ का अध्ययन करता है तत्पश्चात शिक्षा के उद्धेश्यों का निर्माण किया जाता हैं।
  • शैक्षिक समाजशास्त्र की सहायता से शिक्षा की अवधारणा को समझने में सहायता मिलती हैं।
  • शैक्षिक समाजशास्त्र की सहायता से विद्यार्थियों की समस्याओं को समझने में सहायता मिलती है जिससे यह शिक्षण – अधिगम प्रक्रिया में भी अपनी अहम भूमिका का निर्वहन करता हैं।

शैक्षिक समाजशास्त्र का शिक्षा पर प्रभाव Influence of educational sociology on education –

  • पाठ्यक्रम में परिवर्तन आना यह शैक्षिक समाजशास्त्र का ही शिक्षा पर प्रभाव हैं।
  • विकलांग व मंदबुध्दि बच्चों की शिक्षा के लिए पर्यटन आरम्भ हुए एवं इनकी शिक्षा की जिम्मेदारी सरकार ने महसूस की।
  • 6 से 14 वर्ष के छात्रों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा की शुरुआत की गई।
  • शिक्षा को बाल केंद्रित Child Centre बनाया गया।
  • शिक्षण विधियों एवं पाठ्यक्रम को समाज के अनुरूप डिज़ाइन किया गया।
  • शिक्षणो के लिए एक अच्छे प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी।
  • शिक्षा के महत्व को सर्वोपरी स्थान दिया गया।
  • सरकारों द्वारा व्यावसायिक शिक्षा पर अधिक बल दिया जाने लगा।
  • शिक्षा को जीविकोपार्जन हेतु तैयार किया गया।
  • विद्यालयों को समाज का लघु रूप समझा जाने लगा। यह सब तभी संभव हुआ जब शैक्षिक समाजशास्त्र की महत्ता को अपनाया जाने लगा एवं समाज का शिक्षा पर या शिक्षा का समाज पर सीधे रूप से प्रभाव देखा जाने लगा।

व्यक्ति का समाज के साथ संबंध Person’s relationship with society

  • बच्चा जब जन्म लेता है तो वो समाज मे काफी निर्भर रहता है।
  • मानव का स्वभाव
  • मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति समाज मे रहकर ही संभव हो पाती हैं।
  • श्रम विभाजन
  • उत्पादन कार्य

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नमस्कार दोस्तों मेरा नाम पंकज पालीवाल है, और मैं इस ब्लॉग का फाउंडर हूँ. मैंने एम.ए. राजनीति विज्ञान से किया हुआ है, एवं साथ मे बी.एड. भी किया है. अर्थात मुझे S.St. (Social Studies) से जुड़े तथ्यों का काफी ज्ञान है, और इस ज्ञान को पोस्ट के माध्य्म से आप लोगों के साथ साझा करना मुझे बहुत पसंद है. अगर आप S.St. से जुड़े प्रकरणों में रूचि रखते हैं, तो हमसे जुड़ने के लिए आप हमें सोशल मीडिया पर फॉलो कर सकते हैं।

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